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Sirsa News: सिरसा जिले में अब तक हुई 3.78 लाख क्विंटल नरमा की आवक, पिछले साल से दोगुना

सिरसा जिले में कुल 3,78,786 क्विंटल नरमा की आवक हो चुकी है। जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,74,494 क्विंटल के मुकाबले दो गुना से अधिक है। अब तक कुल 8.61 करोड़ रुपये की मार्केट फीस एकत्रित की जा चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.42 करोड़ रुपये था। मगर सवाल यह है कि ज्यादातर किसान इस बार सीसीआई से एमएसपी का लाभ नहीं ले पाए हैं।

 
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Sirsa News: सिरसा जिले में कुल 3,78,786 क्विंटल नरमा की आवक हो चुकी है। जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,74,494 क्विंटल के मुकाबले दो गुना से अधिक है। अब तक कुल 8.61 करोड़ रुपये की मार्केट फीस एकत्रित की जा चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.42 करोड़ रुपये था। मगर सवाल यह है कि ज्यादातर किसान इस बार सीसीआई से एमएसपी का लाभ नहीं ले पाए हैं।


5 सेंटरों पर सीसीआई ने केवल 73,339 क्विंटल नरमा खरीदा है। वहीं निजी खरीददारों की ओर से 3.05 लाख क्विंटल नरमा सस्ते दाम में खरीद किया है। सर्वाधिक 1.16 लाख क्विंटल निजी खरीद सिरसा में हुई। जिसमें न्यूनतम रेट 5800 और अधिकतम 7850 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। सरकारी एमएसपी इस बार लॉन्ग वैरायटी के लिए 7710 और मीडियम के लिए 8110 रुपये प्रति क्विंटल तय है। लेकिन 70 फीसदी नरमा की ट्रॉलियों को क्वालिटी डाउन बताकर रिजेक्ट किया गया। जिससे किसानों में रोष व्याप्त है। सीसीआई की ब्रीद प्रक्रिया पर उठे सवाल, डीसी को दी शिकायतः नरमा की सरकारी खरीद प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर गांव भागसर के किसान अमृतपाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान ने उपायुक्त सिरसा को लिखित शिकायत सौंपते हुए सीसीआई और फैक्ट्री कर्मियों पर धोखाधड़ी और मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। किसान का आरोप है कि उसने सीसीआई पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग कर मंगलवार सुबह फसल लेकर मंडी पहुंचा।

गेट पास कटवाने के बाद उसे सीधे इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फैक्ट्री भेज दिया गया, जहां सीसीआई और फैक्ट्री कर्मियों ने नरमा की गुणवत्ता और वजन चेक कर खरीद पर्ची जारी कर दी। लेकिन जब फसल की तुलाई शुरू हुई तो नरमा को रिजेक्ट कर दिया गया। किसान ने कहा कि जब फैक्ट्री गेट के बाहर तक गुणवत्ता सही मानी गई और पर्ची काटी गई, तो फैक्ट्री में जाते ही क्वालिटी डाउन कैसे हो गई।

किसान ने कहा कि यह सीसीआई और फैक्ट्री के बीच मिलीभगत का मामला है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम की सूचना मार्केट कमेटी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई, लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे किसानों में रोष है।