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Haryana News: हरियाणा में डीएपी खाद को लेकर किसानों की उमड़ी भीड़, जींद में पुलिस ने किसानों को मारी लाठियां
 

Haryana News: हरियाणा में डीएपी खाद को लेकर किसानों की उमड़ी भीड़, जींद में पुलिस ने किसानों को मारी लाठियां
 
 
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Haryana News: Crowd of farmers gathered in Haryana for DAP fertilizer, police lathicharged farmers in Jind

Haryana News: हरियाणा में डीएपी खाद लेने के लिए पुरानी मंडी स्थित फिट कार्यालय के बाहर किसानों की भीड़ उमड़ी। सुबह चार बजे से ही किसान पुरानी मंडी पहुंचने लगे थे। सुब्बा से लाइनों में लगे किसानों को आधार कार्ड पर पांच-पांच बैग डीएपें साद के लिए गए। महिलाएं भी खाद लेने के लिए लाइन में लगी नजर आई। किसानों ने जताया कि किसानों की भीड़ में आपस में हुई पक्का मुक्की के चलते पुलिस द्वारा लाइन बनवाने के दौरान पुलिस कर्मी की लाठी लगने से एक किसान की नाक पर चोट भी ली। पुलिस द्वारा इस तरह की बातों को नकारते हुए कहा कि भोड़ अधिक होने से आपस में चक्का-मुक्की किसानों में होने से गिरने के चलते किसान की नाक के ऊपर चोट लग गई जिससे खून आने लगा। डीएपी
खाद बटने तक पुलिस बल मौजूद रहा। थे। काफी संख्या में किसान बिना खाद शनिवार को 1400 बैग डीएपी के आए मिले वापिस लौटे। 


किसान संदीप, कलशेर
ने कहा कि पान की कटाई हो चुकी है और अब गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी खाद की आवश्यकता है। पिछले रविवार में वे लाइन में लगे थे लेकिन का खाद के बैग खत्म हो गए, वे इसलिए नहीं मिल पाथ। शनिवार को फिर वह सुबह ही आकर लाइन में लगे। अगेती गेहूं की फसल की बिजाई के लिए अभी डीएपी की जरूरत है लेकिन बहुत ही लंबी लाइन लगी हुई है और पीछे से धक्का मुक्की हो रही है। बिजाई से पहले खाद लेने वालों के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकार को चाहिए कि यह डोएपी के लिए इंतजाम करें। हैफेड सेल्समैन सतीज ने बताया कि 1400 बैर आए थे। 5-5 बेग हर किसान को दिए गए। चौकी इंचार्ज चंद्रपाल ने बताया कि जानकारी मिली कि किसानों की भीड़ अधिक होने से एक किसान के गिरने से उसकी नाक पर बेट लगी है। पुलिस कर्मी को लाठी किसी किसान को नहीं लगी। पुलिस द्वारा लाइन बनवा कर शाति पूर्वक तरीके से खाद बंटवाया गया।

किसानों की जरूरत को देखते हुए सरकार को डीएपी के पुख्ता प्रबंध समय रहते करने चाहिए थे - कुमारी शैलजा

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार को जब पता था कि रबी सीजन की फसलों की बिजाई के समय डीएपी खाद का संकट गंभीर रूप ले लेता है तो उसे देखते हुए सरकार ने उचित कदम क्यों नहीं उठाया। क्यों किसानों को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है ऊपर से भाजपा किसान हितेषी होने का दावा करती है। देश में सालाना करीब 110 लाख टन डीएपी की खपत होती है जिसमें से लगभग 70 लाख टन का आयात होता है। ऐसे में किसान डीएपी के लिए मारा मारा फिरता है।
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसी पर खाद खत्म बता दी जाती है जबकि प्राइवेट एजैसी पर वहीं खाद ब्लैक में बिकती है।
मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रमुख उर्वरक डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) की किल्लत ने किसानों की नींद उड़ा दी है। हरियाणा में डीएपी के लिए कुमारी सैलजा किसान लाइनों में लगने को मजबूर हैं, फिर भी जरूरत के मुताबिक डीएपी नहीं मिल पा रहा है। रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना और आलू की बुवाई के लिए किसानों को डीएपी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह तो डीएपी के लिए मारामारी की स्थिति पैदा हो गई है और किसान धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। उर्वरक के रूप में यूरिया के बाद देश में सबसे अधिक खपत डीएपी की होती है। डीएपी का प्रयोग मुख्यतः फसल की बुवाई के समय किया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल सितंबर में डीएपी की बिक्री पिछले साल के 15.7 लाख टन के मुकाबले 51 फीसदी घटकर 7.76 लाख टन रह गई है। जबकि इस साल अच्छे मानसून के कारण उर्वरकों की मांग बढ़ी है। डीएपी का मौजूदा संकट खरीफ सीजन के दौरान ही शुरू हो गया था जो अब सामने दिख रहा है।

उन्होंने कहा है कि इस साल अप्रैल से अगस्त 2024 तक भारत में 15.9 लाख टन डीएपी का आयात हुआ, जो पिछले साल इसी अवधि में हुए 32.5 लाख टन डीएपी आयात से 51 फीसदी कम है। उन्होंने कहा कि डीएपी आने से किसानों की समस्याओं का हल होगा।