Jind News: 151 में से 148 डॉक्टर हड़ताल पर, सिविल अस्पताल में 30% रही ओपीडी, विशेषज्ञ नहीं होने से लौट रहे मरीज
Jind News: सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। जिसके चलते अस्पताल की ओपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। दिनभर में सामान्य दिनों के मुकाबले केवल 30 फीसदी यानी केवल 600 मरीज ही ओपीडी में पहुंच पाए, जबकि सामान्य दिनों में 2000 तक मरीज पहुंचते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही इस भारी कमी का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
जिले से 4 डॉक्टर डॉ. ख्याली, डॉ. वीरेंद्र डांडा और डॉ. लाभ व डॉ. सोनल अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ में चल रहे राज्यस्तरीय आंदोलन में शामिल हुए। जानकारी के अनुसार देर रात डॉ. सोनल की तबीयत बिगड़ गई, इसके बावजूद उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। डॉक्टरों के हौसले और एकजुटता के चलते हड़ताल में और मजबूती देखने को मिली। जिले में 151 डॉक्टर हैं इनमें से 148 डॉक्टर चार दिनों से लगातार हड़ताल पर हैं।
विशेषज्ञों की लिखी दवा बदल रहे
मरीज श्याम लाल निवासी जींद ने कहा कि वह सुबह 9 बजे अस्पताल में आए थे। लेकिन यहां पर विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से उनको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वह पहले से सांस का रोगी है। डॉक्टर ने उसकी लंबी दवा चला रखी है। अब यहां पर कोई नया डॉक्टर है, जो अपनी हिसाब से दवा देता है। वह समझते हैं कि डॉक्टरों की अपनी मांगें होंगी, लेकिन मरीजों की भी मजबूरी है। इतनी दूर से उम्मीद लेकर आते हैं और इलाज न मिलने पर वापस खाली हाथ लौटना बहुत कठिन लगता है।
हड़ताल लंबी चली तो बढेगी परेशानी
मरीज रोहतास निवासी जींद ने बताया कि वह उसके बुजुर्ग पिता को चेकअप के लिए लाया था, लेकिन हड़ताल के कारण कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिला। अंडर ट्रेनिंग जो डॉक्टर हैं वह यहां पर ओपीडी में मरीजों की जांच कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई दवा गलत लिखी जाए, उसका इनफेक्शन हो जाए तो उसको जिम्मेदार कौन होगा। कई लोग लाइन में खड़े-खड़े परेशान हो रहे हैं। वह सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर हैं। हड़ताल जितनी लंबी चलेगी, आम लोगों की परेशानी उतनी ही बढ़ेगी।
यह संघर्ष सिर्फ डॉक्टरों का ही नहीं, बल्कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का है'
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के राज्य संयोजक एवं जिला प्रधान बिरेंद्र ढांडा ने कहा कि वे मजबूरी में हड़ताल कर रहे हैं, क्योंकि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए इनका पूरा होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ डॉक्टरों का ही नहीं, बल्कि मरीजों की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का भी मुद्दा है। सरकार की ओर से बैठक के संकेत मिले हैं, जिसके बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल सभी की निगाहें देर रात होने वाली डॉक्टरों की बैठक और सरकार के रुख पर टिकी हैं। गुरुवार देर रात डॉक्टरों की एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें आगे की रणनीति और अपनी मुख्य मांगों को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस निर्णय लेती है, तो वे हड़ताल को समाप्त करने पर विचार करेंगे। अन्यथा अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सीएमओ, सिविल अस्पताल जींद ने बताया कि अस्पताल में नियमित ओपीडी चल रही है। हमने 15 डॉक्टरों को खानपुर, ईएसआई व आयुष्मान पैनल से बुलाया हुआ है। जो ओपीडी में आने वाले मरीजों की नियमित जांच कर रहे हैं। मरीजों को कुछ परेशानी है, लेकिन हम प्रयास कर रहे हैं कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले।