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जींद में ओलावर्ष्टि से नष्ट हुई गेहूं और सरसों की फसलें,  फसल खराबे की भरपाई के लिए 48 घंटे बाद भी नहीं खुला क्षतिपूर्ति पोर्टल
 

सरकार को तुरंत क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलना होता है, जिससे किसान अपनी फसलों का ब्यौरा दे सके और अपने नुकशान कि भरपाई कर सके। लेकिन जिले में क्षतिपूर्ति पोर्टल बंद होने के कारण किसान नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन नहीं कर सकते।

 

Jind News: दो दिन हुई बारिश से हरियाणा के कई जिलों में किसानों को काफी नुकशान पहुंचा है।  वहीँ जींद जिला भी पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावर्ष्टि कि चपेट में है।  इस ओलावर्ष्टि के चपेट से जिलेभर में हजारों किसानों की फसल में नुकसान हुआ है।

इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को तुरंत क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलना होता है, जिससे किसान अपनी फसलों का ब्यौरा दे सके और अपने नुकशान कि भरपाई कर सके। लेकिन जिले में क्षतिपूर्ति पोर्टल बंद होने के कारण किसान नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन नहीं कर सकते।


जींद में हजारों किसानों कि फसलें तबाह 
मिली जानकारी के अनुसार बता दे कि हरियाणा में पिछले दिनों हुई बारिश से जिले में लगभग एक हजार के आसपास किसानों की फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई थी। 

फसल के नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को 72 घंटे में क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबे की जानकारी अपलोड करनी थी। लेकिन अभी तक किसान अपनी जानकारी अपलोड नहीं कर प् रहे है। क्योकि सरकार द्वारा पोर्टल को खोला ही नहीं गया है। 

जींद में ये छेत्र सबसे अधिक ओलावर्ष्टि कि चपेट में 
ओलावृष्टि के कारण उचाना, जींद, जुलाना, पिल्लूखेड़ा, नरवाना, उझाना व सफीदों खंड के सैकड़ों गांवों में गेहूं व बागवानी की फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान गेहूं में है, जबकि 70 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान सब्जी की खेती में हैं। 

जिले में किसानों की फसल खराबे को लेकर फिलहाल प्रशासन गंभीर नहीं है। इस कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ओलावृष्टि और बारिश से फसलों के नुकसान के आकलन के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी होती है। 

नुकसान का आकलन दर्ज करने के लिए किसान को क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ओलावृष्टि या ज्यादा बारिश समेत अन्य आपदा आने पर फसल में हुए नुकसान की जानकारी देनी होती है। 

इसके बाद राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार कर किसान को हुए नुकसान की भरपाई की जाती है।