Himachal news: हिमाचल सरकार करेगी बच्चों का स्वास्थ्य डेटा तैयार, स्वास्थ्य मिशन के तहत वार्षिक स्कूल हैल्थ कलैंडर जारी करने के दिए आदेश
Himachal News: हिमाचल प्रदेश में सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य का वार्षिक डाटा तैयार करने की आदेश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में प्रदेश सरकार के आदेश पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वार्षिक स्कूल हैल्थ कलैंडर जारी किया है। इससे स्कूल स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य का पूरा डाटा तैयार होगा और उनके स्वास्थ्य पर ध्यान रखा जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के द्वारा जारी वार्षिक स्कूल हैल्थ कलैंडर में साल भर में 26 गतिविधियों के माध्यम से बच्चों व अभिभावकों को स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया गया है। इसके लिए स्कूल मुखियों को आदेश जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों में बढ़ती बीमारियों को रोकने के लिए प्रत्येक स्कूल में दो अध्यापक हैल्थ एंबेसडर बनाए गए हैं व उनको प्रशिक्षित करके स्कूलों में स्वास्थ्य गतिविधियों करने को कहा गया है। इससे पहले स्कूलों में वार्षिक हैल्थ चेकअप के माध्यम से बच्चों को बीमारियों को पता लगाने के लिए कार्ड भी बनाए जाते हैं, लेकिन इसका स्कूलों में उतना प्रभाव देखने को नहीं मिला है। अधिकारियों का मानना है कि अभिभावक बुखार या खांसी को सामान्य समझ लेते हैं और समय पर बीमारी का इलाज नहीं करवाते है। इससे बच्चों में अनेकों बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है। स्कूल वार्षिक हैल्थ कलैंडर में जहां बच्चों के साथ अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा, वहीं स्कूल के प्रत्येक बच्चे का डाटा तैयार करना होगा, ताकि बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके। बच्चे की बीमारी के बारे में अभिभावकों को जागरूक करके चिकित्सकों के पास जाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इस पर स्कूल मुखियों और प्रभारी अध्यापकों की जिम्मेवारी तय की गई है।
उप शिक्षा अधिकारी दिया यह आदेश
हमीरपुर जिला उप शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक डॉ. ओंकार सिंह भाटिया का कहना है कि सरकार के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वार्षिक स्कूल हैल्थ कलैंडर जारी किया है। इसे सभी
स्कूलों को तैयार करना होगा व इसकी स्कूल निरीक्षण के दौरान अवलोकन किया जाएगा। इससे स्कूल में हरेक बच्चे को स्वास्थ्य डाटा तैयार होगा। जो बच्चों को स्वस्थ रखने में मदद करेगा।
हमीरपुर शहर ने पहली बार देखा पश्चिम बंगाल का भक्ति कल्चर
पश्चिम बंगाल की भक्ति संस्कृति पहली बार जिला मुख्यालय में देखने को मिली है। पश्चिम बंगाल के स्वर्ण कारीगरों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से अपने रीति रिवाज अनुरूप काली माता का पूजन शुरू किया है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल कर माता रानी को प्रसन्न किया जा रहा है। हिमाचली संस्कृति से इनका कल्चर काफी अलग है। वाद्य यंत्र भी हिमाचल के वाद्य यंत्रों से भिन्न है। इनके द्वारा आयोजित किए जा रहे विशेष कार्यक्र म को देखने के लिए स्थानीय लोग भी काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। शहर में स्वर्णकारों की दुकानों में सोने, चांदी को पिघलाकर गहनों के आकार में ढालने वाले इन कारीगरों ने मिलकर काली माता की पूजा अर्चना शुरू की है। पश्चिम बंगाल में दीपावली के पर्व पर काली माता की विशेष पूजा
होती है। दिवाली पर्व पर स्वर्णकारों की दुकानों में ग्राहकों की भीड़ होने के कारण पश्चिम बंगाल के ये कारीगर अपने घर नहीं जा पाते, जिस कारण इन्हें दिवाली हमीरपुर में ही हिमाचली संस्कृति के अनुरूप मनानी पड़ती थी। इस बार इन सभी ने एकजुटता का प्रमाण देते हुए हमीरपुर में पश्चिम बंगाल की सभ्यता के अनुरूप माता रानी का पूजन शुरू किया है। दीवाली के अवसर पर यहां चंडीगढ़ से काली माता की बड़ी मूर्ति लाई गई, जिसका विविधत पूजन कर पंडाल में स्थापित किया गया है। शनिवार रात को जागरण का आयोजन किया जाएगा तथा 3 नवंबर को विसर्जन होगा।