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Hydrogen Train: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलने के लिए बिल्कुल तैयार, इस सप्ताह जींद स्टेशन पर ट्रेन का लोड चेक करने को होगा फाइनल ट्रायल

देश की पहली बार हाइड्रोजन गैस (ईंधन) से ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने के लिए तैयार है। 9 किलोग्राम पानी से 900 ग्राम हाइड्रोजन ईंधन बनेगा और 1 किमी ट्रेन की माइलज होगी। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 150 किमी प्रति घंटा होगी। जींद से सोनीपत और वापसी में सोनीपत से जींद के बीच 90-90 किमी की दूरी तय करने के लिए हाइड्रोजन गैस बनाने पर प्रत्येक घंटे 35 से 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी। रेलवे ने प्लांट के साथ ही भूजल दोहन के लिए एक ट्यूबवेल लगाया है।
 

Jind To Sonipat Hydrogen Train: देश की पहली बार हाइड्रोजन गैस (ईंधन) से ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने के लिए तैयार है। 9 किलोग्राम पानी से 900 ग्राम हाइड्रोजन ईंधन बनेगा और 1 किमी ट्रेन की माइलज होगी। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 150 किमी प्रति घंटा होगी। जींद से सोनीपत और वापसी में सोनीपत से जींद के बीच 90-90 किमी की दूरी तय करने के लिए हाइड्रोजन गैस बनाने पर प्रत्येक घंटे 35 से 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी। रेलवे ने प्लांट के साथ ही भूजल दोहन के लिए एक ट्यूबवेल लगाया है। हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन को अलग करने के बाद वेस्ट पानी का उपयोग रेलवे कोचों की सफाई और सिंचाई के लिए प्रयोग किया जा सकेगा। यह जीरो वेस्ट पानी से हाइड्रोजन का प्लांट जींद रेलवे स्टेशन पर स्पेन की कंपनी ने तैयार कर चुकी है। प्लांट के लेआउट को प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिल चुकी है।

900 ग्राम हाइड्रोजन ईंधन से ट्रेन एक किमी का सफर तय करेगी

चेत्रई की इंट्रीगल फैक्ट्री में तैयार हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के लिए 4 ड्राइवर पावर कार (डीपीसी) और 16 कोच शकूर बस्ती स्टेशन पर पहुंच चुके हैं। 26 जनवरी से 2 डीपीसी और 8 यात्री बोगियों वाली इस ट्रेन को जींद से सोनीपत के बीच 90 किमी चलाया जाएगा। इसी सप्ताह ट्रेन का जींद रेलवे स्टेशन पर लोड चेक करने के लिए फाइनल ट्रायल होगा। लोड फैक्टर की ज्वाइंट रिपोर्ट रेलवे, आरडीएसओ व स्पेन की ग्रीन एच कंपनी के अधिकारी बनाएंगे। रिपोर्ट पर पीएमओ से अंतिम मंजूरी के बाद ट्रेन चलेगी।

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की विशेषता

ट्रेन के आगे और पिछले हिस्से में ड्राइवर पावर कार होगा। दोनों डीपीसी में 1200-1200 हार्स पावर का मोटर इंजन लगाया गया है। डीपीसी में फ्यूल सेल लगाया गया है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से डीसी बिजली करंट बनाएगा। डीपीसी से 3750 एम्पियर डीसी करंट बनेगा, जिससे ट्रेन के अंदर पंखे, लाइट व एसी चलेंगे। यात्रियों के लिए 8 डिब्बे होंगे। यात्री कोच के दोनों तरफ 2-2 दरवाजे प्रवेश और निकासी के लिए होंगे। ट्रेन के दोनों छोर पर पावर कार में मौजूद ड्राइवर द्वारा दरवाजा बंद करने के बाद ट्रेन प्लेटफार्म से आगे बढ़ सकेगी। मेट्रो की तरह कोच में डिसप्ले पर आने वाले नजदीकी स्टेशन के बारे में सूचना प्रसारित होगी। 

टैंक में 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस होगी स्टोर

प्लांट को चलाने के लिए रेलवे ने 1.5 मेगावाट बिजली का कनेक्शन लिया है। हाइड्रोजन बनाकर बड़े टैंक में 3,000 किलोग्राम गैस स्टोर किया जा सकेगा। स्टोरेज के लिए 2 टैंक बनाए गए हैं। 2320 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस स्टोर करने के लिए अलग टैंक है। 7680 किलोग्राम ऑक्सीजन को स्टोर करने के लिए अलग टैंक बना है।