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Sirsa News: सिरसा जिले में पराली जलाने पर प्रशासन सख्त, 23 किसानों पर एफआईआर, जुर्माना और पोर्टल में रेड एंट्री

हरियाणा प्रदेश के सिरसा जिले में पराली जलाने पर सख्ती के बावजूद अब तक 49 लोकेशन पर अवशेष जलाने की सूचना मिली है, जिनमें से 23 स्थानों पर किसानों द्वारा पराली जलाना प्रमाणित हुआ, जबकि 26 लोकेशन फेक निकलीं। इनमें कुछ खेतों में सरसों की फसल लगी पाई गई और कुछ लोकेशन पंजाब सीमा में दर्ज हुई।
 

Sirsa News: हरियाणा प्रदेश के सिरसा जिले में पराली जलाने पर सख्ती के बावजूद अब तक 49 लोकेशन पर अवशेष जलाने की सूचना मिली है, जिनमें से 23 स्थानों पर किसानों द्वारा पराली जलाना प्रमाणित हुआ, जबकि 26 लोकेशन फेक निकलीं। इनमें कुछ खेतों में सरसों की फसल लगी पाई गई और कुछ लोकेशन पंजाब सीमा में दर्ज हुई। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 23 किसानों पर एफआईआर दर्ज की, 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर रेड एंट्री की गई है। इसका सीधा असर यह होगा कि ये किसान आगामी दो वर्षों तक किसी भी सरकारी योजना या अनुदान का लाभ नहीं ले पाएंगे। वहीं पिछले वर्ष जिले में पराली जलाने के 188 मामले सामने आए थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 23 रह गई है। प्रशासन इसे किसानों की बढ़ती जागरूकता और सख्त निगरानी का परिणाम मान रहा है।

जिले में धान के अवशेष जलाना पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया। इस दौरान गांव गांव स्तर पर नोडल अधिकारी की तैनाती की, जिसमें पटवारी, ग्राम सचिव, सरपंच व नंबरदार के अलावा कृषि विभाग के अधिकारी निगरानी में लगाए गए। ताकि सूचना के तुरंत बाद टीम मौके पर पहुंच पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एक्शन ले। ऐलनाबाद क्षेत्र में ड्यूटी में लापरवाही पर एक पटवारी और ग्राम सचिव निलंबित कर दिए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निगरानी में चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिसके मध्य नजर प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट है। 

जिले के विभिन्न गांवों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक शिव कुमार के साथ सहायक कृषि अभियंता विजय जैन ने फील्ड विजिट की। इस दौरान उनके साथ संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने खेतों में पराली प्रबंधन, अवशेष निस्तारण, प्रदूषण की स्थिति और किसानों द्वारा अपनाई जा रही तकनीकों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि पराली जलाने की घटनाएं न हों और यदि कोई उल्लंघन पाया जाए तो संबंधित पर तत्काल कार्रवाई की जाए। वैज्ञानिकों ने किसानों को अवशेष प्रबंधन से पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की जानकारी दी।