राशन लेने निकली थी मां, तभी आई बेटी के गोल्ड जीतने की खबर, नीरू ढांडा की कहानी कर देगी भावुक
Neeru Dhanda: हरियाणा के जींद के संगतपुरा गांव में मंगलवार को खुशियों का लहर देखने को मिला। संगतपुरा गांव की बेटी नीरू ने ऐसा इतिहास रच दिया जो कि सिर्फ हरियाणा और जिंद ही नहीं बल्कि भारत का नाम भी रोशन कर दी है । मंगलवार को नीरू की मां सूदेश देवी राशन लेने जा रही थी, तभी उनके कीपैड वाले फोन पर एक अनजान फोन आया और बताया गया कि उनकी बेटी ने एशियाई गेम्स में गोल्ड जीत लिया है। नीरू के घर में कोई टीवी नहीं है ना ही कोई स्मार्टफोन है जिसकी वजह से उनकी मां सुदेश देवी मुकाबला देख नहीं पाई। लेकिन जैसे ही बेटी के गोल्ड जीतने की खबर सामने आई माँ हैरान रह गई।
पहले तो सुदेश देवी को भरोसा ही नहीं हुआ कि नीरू ने सच में इतिहास रच दिया है लेकिन जैसे ही खबर की पुष्टि हुई मां के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। एक छोटे से गांव से निकली बेटी की उपलब्धि नहीं पूरे देश गौरांवित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सुदेश देवी यानी की नीरू की मां को पता ही नहीं था कि उनकी बेटी एशियन गेम्स में मुकाबला करने वाली है। अंजन कॉल आने के बाद उनकी मां को यकीन ही नहीं हुआ कि उनकी बेटी गोल्ड जीत चुकी है। बेटी के गोल्ड जीतने की खबर की वजह से मां के आंखों में आंसू आ गया।
नीरू की इस कामयाबी तो इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि एशियन गेम्स के 10 दिन पहले वह गंभीर फ्लू के चपेट में आ गई थी और उन्हें भोपाल के अस्पताल में एडमिट भी किया गया था। नीरू ठीक से खाना नहीं खा पा रही थी इसके बावजूद भी उनके कोच मंशेर सिंह ने उन्हें बीमारी को छोड़कर निशाने पर ध्यान देने की सलाह दी। नीरू ने अपने कोच की बात सुनी और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
सबसे गर्व की बात है कि नीरू ने अपनी उपलब्धि देश की सीमा पर तैनात जवानों को समर्पित की। उन्होंने 1978 में एशियन गेम्स में व्यक्तिगत ट्रैप गोल्ड जीतने वाले रणधीर सिंह को भी याद किया। अब जिंदगी बेटी नीरू ओलंपिक में गोल्ड जीतना चाहती है।