Rajasthan News: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में खाद के लिए किसानों की एक किलोमीटर लंबी लाइनें, सुबह से इंतजार, फिर भी कई लोग खाली हाथ लौट रहे
Rajasthan News: राजस्थान प्रदेश में इन दोनों खाद के लिए किसानों की लंबी-लंबी कतारें लगी दिखाई दे रही हैं। प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में खाद संकट ने किसानों की नींद उड़ा दी है। क्रय-विक्रय सहकारी समिति और कृषि मंडी के पीछे स्थित लैम्प्स समितियों में सुबह से ही सैकड़ों किसान खाद के लिए लाइनों में खड़े रहे। लैम्प्स में करीब 800 बैग स्टॉक बताया जा रहा है और विभाग द्वारा नई डिमांड भेज दी गई है, लेकिन मांग अधिक होने से यह मात्रा ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है। किसानों को विभाग की ओर से प्रति आधार कार्ड केवल दो यूरिया के कट्टे दिए जा रहे हैं। प्रत्येक बैग की सरकारी कीमत 267 रुपए है। हालांकि, इस सीजन में गेहूं, मटर, सरसों और चने की बुवाई जोरों पर चल रही है, ऐसे में खाद न मिलने से किसानों की फसल कार्य प्रभावित हो रहा है। कई किसान सुबह से लेकर दोपहर तक लाइन में लगे हैं, लेकिन बैग खत्म हो जाने की वजह से खाली हाथ लौट रहे हैं।
किसानों की जुबानी सुबह से लाइन, फिर भी खाद नहीं
अंगूर बाला मीणा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, सुबह से लाइन में लगे हुए हैं, दस बजने के बाद भी खाद नहीं मिला। हर जगह यही समस्या है, कोई सुनवाई नहीं हो रही। देवगढ़ के गांव लालपुरा के किसान सूरजमल ने बताया, सुबह 6 बजे से लाइन में हैं, एक किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है। खाद कम पड़ रही है और जो यूरिया मिलनी चाहिए, वह समय पर नहीं मिल रही है, इससे फसल खराब हो रही है। अखेपुर के किसान अर्जुन लबाना ने कहा, सुबह से महिलाओं और बुजुगों तक को लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। खाद की किल्लत से किसानों की हालत खराब है। ब्लैक मार्केट में खाद दो से तीन गुना दाम में बिक रही है, लेकिन हर किसान इतनी
कीमत नहीं चुका सकता, इसलिए सरकारी समितियों में लाइन लगानी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर खाद वितरण में पारदर्शिता और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, वरना फसलें सूखने लगेंगी और आमदनी पर बड़ा असर पड़ेगा। खाद संकट से फसल कृषि उत्पादन पर असर : विशेषज्ञ मधुसूदन शर्मा बताते हैं कि इस समय रबी की प्रमुख फसलें गेहूं, चना, सरसों और मटर रोपाई या शुरुआती वृद्धि चरण में हैं, जिनके लिए यूरिया और डीएपी दोनों अनिवार्य हैं।
समय पर खाद नहीं मिलने से पौधों को होता है नुकसान
समय पर खाद न मिलने से पौधों की जड़ें कमजोर होती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। शर्मा के अनुसार, देर से खाद डालने पर गेहूं की बालियां छोटी रह जाती हैं और दाने भरने में कमी आ जाती है। उन्होंने सलाह दी कि किसानों को चाहिए कि जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक संयम बरतकर वैकल्पिक रूप से जैविक खाद या नत्रजनयुक्त उर्वरक का आंशिक उपयोग करें। प्रशासन को जरूरत के अनुसार स्टॉक बढ़ाकर तत्काल राहत पहुंचानी चाहिए, वरना इस बार फसल का नुकसान होना तय है। (Rajasthan News)