Haryanaline_Logo

Soybean Rate: भावांतर में बिका सिर्फ 31% सोयाबीन, 69 फीसदी मार्केट के भरोसे, ट्रेड डील की चर्चा के बीच मप्र में 600 रुपए तक गिरे दाम

बाजार हलकों में इस उतार-चढ़ाव को भारत-अमेरिका के हालिया व्यापार समझौते के बाद बने आयात संबंधी संकेतों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमतों पर अन्य बाजार कारकों का असर भी समानांतर रूप से रहा। इधर, भावांतर योजना के तहत सोयाबीन बेचने वाले करीब 9 हजार किसानों के लगभग 22 करोड़ रुपये अब तक अटके हुए हैं, जिसकी वजह बैंक खातों की त्रुटियां और आधार सीडिंग अधूरी होना बताई जा रही है।
 
Whatsapp-Group

Bhavantar Scheme: इस सीजन में प्रदेश की कुल सोयाबीन उपज का सिर्फ 31 प्रतिशत ही भावांतर भुगतान योजना के दायरे में आया, जबकि करीब 69 फीसदी उपज किसानों ने या तो खुले बाजार में बेच दी या अभी बिक्री के इंतजार में है, जहां दाम पूरी तरह बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर हैं। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5328 रुपये प्रति क्विंटल तय है। योजना के तहत खरीदी बंद होने के बाद 16 से 31 जनवरी के बीच मंडियों में भाव एमएसपी से ऊपर निकलकर 5500 से 5800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। लेकिन 6 से 8 फरवरी के बीच कई मंडियों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 

बाजार हलकों में इस उतार-चढ़ाव को भारत-अमेरिका के हालिया व्यापार समझौते के बाद बने आयात संबंधी संकेतों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमतों पर अन्य बाजार कारकों का असर भी समानांतर रूप से रहा। इधर, भावांतर योजना के तहत सोयाबीन बेचने वाले करीब 9 हजार किसानों के लगभग 22 करोड़ रुपये अब तक अटके हुए हैं, जिसकी वजह बैंक खातों की त्रुटियां और आधार सीडिंग अधूरी होना बताई जा रही है।

2.41 लाख किसानों ने योजना में नहीं बेचा सोयाबीन

भावांतर योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 तक सोयाबीन बेचने वाले 6.95 लाख किसान हैं, जबकि 9 लाख 36 हजार 352 किसानों ने पंजीयन कराया था। यानी 2.41 लाख किसानों ने योजना के अंतर्गत सोयाबीन नहीं बेंचा। इस योजनांतर्गत व्यापारियों ने 16.94 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदा। मॉडल रेट से कम दाम होने पर सरकार ने किसानों को 1454 करोड़ रुपये दिए। इस वर्ष 2025-26 में 55.54 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ है। प्रदेश में सोयाबीन की बुवाई का रकबा गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 58.72 लाख हेक्टेयर था जो वर्तमान में 53.20 लाख हेक्टेयर है।

एक महीने में मक्का का रेट और टूटा

बीते एक महीने में मक्का के दामों में और नरमी आई है। जनवरी 2026 में जहां मक्का का औसत रेट 1,604 रु. प्रति क्विंटल था, वहीं फरवरी 2026 में यह घटकर 1,549 रु. पर आ गया। यानी सिर्फ एक महीने में 55 रु. की और गिरावट दर्ज हुई। सालाना तुलना करें तो तस्वीर और चिंताजनक दिखती है। फरवरी 2025 में मक्का 2, 148 रु. प्रति क्विंटल बिक रहा था, जबकि इस साल फरवरी में भाव करीब 599 रु. नीचे आ गए। जनवरी 2025 में भी रेट 2,253 रुपये था, जो जनवरी 2026 में घटकर 1,604 रु. रह गया। साफ है कि मक्का के बाजार में साल भर में 600 रु. तक की गिरावट ने किसानों की आय पर सीधा असर डाला है।