109 तालाबों में आधा पानी भी नहीं भरा, बड़वानी में जलसंकट का खतरा बढ़ा
Barwani News: बड़वानी जिले के 109 तालाबों में मानसून के दो महीने बीत जाने के बाद भी आधा पानी नहीं भर पाया है। जून से शुरू हुई मानसूनी बारिश के शुरुआती दिनों में तो तेज बारिश हुई, लेकिन पिछले एक महीने से बारिश का सिलसिला थम गया है। मौसम की बेरुखी के कारण अधिकांश तालाब सूखे पड़े हैं।
जल संसाधन विभाग के अनुसार जिले के तालाबों में पानी का स्तर केवल 40 फीसदी तक पहुंच पाया है, जबकि कोई भी तालाब पूरी तरह भरा नहीं है। यह स्थिति गंभीर है क्योंकि तालाब न केवल खेतों की सिंचाई के लिए जरूरी हैं, बल्कि वे आसपास के कुओं, हैंडपंप, ट्यूबवेल और बावड़ियों के जलस्तर को रिचार्ज करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
जलभराव न होने के कारण अन्य जल स्रोत भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे पीने और सिंचाई के पानी की कमी हो सकती है। जिले के किसानों को पहले ही फसलों में पानी की कमी से परेशानी हो रही है, कई खेत मुरझाने लगे हैं। किसान निजी संसाधनों से फसल बचाने के प्रयास में लगे हैं और नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं।
बावनगजा रोड के झरने भी सूखे हैं, जिससे पर्यटक प्रभावित हो रहे हैं।जिले में 35 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि तालाबों पर निर्भर है। तालाबों के सूखे रहने से रबी और खरीफ की फसलों को पानी देने में संकट होगा। नगर पालिका सेंधवा का रेलावती तालाब और नगर परिषद राजपुर का नरावला तालाब शहरी जलापूर्ति के लिए उपयोगी हैं, लेकिन इस बार इन तालाबों में पानी का स्तर भी बहुत कम है। रेलावती तालाब में मात्र 19 फीसदी और नरावला तालाब में केवल 5 फीसदी पानी भरा है। बारिश न होने पर पेयजल आपूर्ति बाधित होने का खतरा है। फिलहाल गोई नदी ही जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत बनी हुई है।
भू-अभिलेख कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इस साल अब तक 170 से 400 मिमी के बीच बारिश हुई है। जिले की औसत बारिश 294 मिमी दर्ज हुई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 6 इंच कम है। बारिश कम होने से तापमान में वृद्धि हुई है। बावनगजा क्षेत्र में पर्यटक आकर्षण के रूप में जाने जाने वाले झरने सूखे हैं और आसपास की हरियाली भी कम हो गई है।
इस वजह से पर्यटक मायूस हैं और लोगों को गर्मी व उमस सहने में दिक्कत हो रही है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भी बारिश की गति थमी हुई है और तापमान 30 डिग्री तक पहुंच चुका है।यह स्थिति यदि इसी तरह बनी रही तो आगामी गर्मी में जिले में जलसंकट गहरा सकता है, जिससे किसानों और आम जनता दोनों को पीने और खेती के लिए पानी की किल्लत झेलनी पड़ सकती है। जल संसाधन विभाग और प्रशासन को जल्द इस स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
