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MP News: मप्र के इस जिले में किसानों को मिली बड़ी सौगात, 21.24 करोड़ की तीन सिंचाई योजनाओं को मंजूरी

मप्र के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा क्षेत्र में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। किसानों के लिए 21.24 करोड़ रुपए की लागत से तीन महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मिल गई है। इससे किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। विधायक कमलेश्वर डोडियार के प्रयास से बाजना जनपद के तहत घटालिया पंचायत के धावड़िया, कुण्डियापाड़ा के बोरपाडा और देवली के रूपारेल गांव में 21.24 करोड़ रुपए की लागत से तीन महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मिल गई है। 
 
approval 3 irrigation schemes of 21.24 crore in Ratlam
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MP News: मप्र के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा क्षेत्र में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। किसानों के लिए 21.24 करोड़ रुपए की लागत से तीन महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मिल गई है। इससे किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। विधायक कमलेश्वर डोडियार के प्रयास से बाजना जनपद के तहत घटालिया पंचायत के धावड़िया, कुण्डियापाड़ा के बोरपाडा और देवली के रूपारेल गांव में 21.24 करोड़ रुपए की लागत से तीन महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मिल गई है। 

धावड़िया बैराज, बोरपाडा बैराज और रूपारेल तालाब को औपचारिक स्वीकृति मिल गई। विधायक डोडियार के पिछले दो सालों के अथक और विधानसभा सत्रों में लगातार इन तालाबों की मांग उठाई और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से सवाल किए। डोडियार ने एक विधानसभा सत्र के दौरान सरकार से प्रश्न के माध्यम से स्पष्ट रूप से मांग स्वरूप पूछा था कि क्षेत्र में लंबित सिंचाई योजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए ताकि बारिश पर निर्भर किसान लाभान्वित हों। मंत्री सिलावट ने विधायक डोडियार की मांग को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया था कि 'अति शीघ्र' निर्माण कार्य शुरू होगा।

रबी-खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ेगा

इन परियोजनाओं से क्षेत्र की 1,159 हेक्टेयर (करीब 2,800 एकड़) कृषि भूमि को नई सिंचाई सुविधा मिलेगी। रबी-खरीफ फसलों का उत्पादन 30-40 प्रतिशत बढ़ेगा। धावड़िया बैराज (9.55 करोड़) 570 हेक्टेयर, बोरपाडा बैराज (8.10 करोड़) 467 हेक्टेयर और रूपारेल तालाब (3.59 करोड़, नहर रहित) 122 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभपहुंचाएंगे। यह बैराज माही और जामड नदी की सहायक धाराओं पर बनेंगे, जो सोयाबीन, कपास व गेहूं जैसी फसलों के लिए वरदान साबित होंगे। इसके अलावा, भू-जल स्तर में वृद्धि से गर्मियों में पेयजल संकट कम होगा और स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बाजना के किसानों में उत्साह व्याप्त है।