Ratlam News: रतलाम जिले में करमदियों से करोंदी का नाम पड़ा करमदी, अब उद्योगों से बन रहा आत्मनिर्भर
Ratlam News: रतलाम शहर से 5 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में बसे करमदी ग्राम पंचायत की पहचान अब इतिहास या आस्था तक सीमित नहीं रही। यह गांव पर्यावरण, सेवा और विकास की मिसाल बन चुका है। कभी सैलाना रियासत के अधीन रहा करमदी, जिसे उस समय करोंदी कहा जाता था, अब रिंग रोड और सिटी फोरलेन के साथ आत्मनिर्भर पंचायत के रूप में उभरा है। करमदी की भूमि संत कदंब की तपस्या से पवित्र हुई। किंवदंती है कि जब वे अस्वस्थ हुए तो उन्होंने मां गंगा से कहा अब मैं दूर जाकर स्नान नहीं कर सकता। मां गंगा ने उत्तर दिया कि मैं तेरे पास आऊंगी। अगले दिन संत ने देखा कि कुंड से जल की तेज धार निकल रही है, जो आज तक निरंतर बह रही है। यहीं बना कर्मदेश्वर महादेव मंदिर जो लगभग ढाई सौ साल पुराना है।
मंदिर में तीन कुंड हैं, जिनसे गोमुख के जरिए जल बाहर आता है। 95 वर्षीय कमलाबाई ताली बताती हैं कि जब मैं विवाह के बाद आई तब भी मंदिर ऐसा ही था। दादी-सास कहती थीं, यहां मां गंगा का वास है। गांव के बुजुर्ग मोतीलाल पटेल बताते हैं कि पहले यहां बड़ी-बड़ी करमदियां (झाड़ियां) होती थीं, इसलिए इसका नाम करमदी पड़ा। मंदिर भी कलेक्टर की अधीनता में कोर्ट ऑफ वार्ड संपत्ति के रूप में आता है। पुजारी परिवार पीढ़ियों से पूजा कर रहा है।
करमदी अब इतिहास नहीं, भविष्य लिख रहा है। यहां नमकीन क्लस्टर चालू है और साड़ी क्लस्टर प्रस्तावित। रिंग रोड और सिटी फोरलेन ने कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। गांव का सूरजमल जैन तालाब तीन गांवों करमदी, तीतरी और मथुरी की जीवनरेखा है। इसी के जल से खेत सींचे जाते हैं। जामफल, फूल, हरी सब्जियां और मटर जैसी फसलें प्रमुख हैं।
गांव में पर्यावरण संरक्षण बन चुकी है परंपरा
यहां पर्यावरण संरक्षण परंपरा बन चुका है। कन्या के जन्म पर फलदार पौधा और मृत्यु पर औषधीय पौधा लगाया जाता है। यह परंपरा 2007 में शुरू हुई, जब एक परिवार को अंतिम संस्कार के समय लकड़ियों की कमी महसूस हुई। तभी विचार आया कि हर मृत्यु के बाद पौधा लगाना चाहिए। तब से यह रिवाज पूरे गांव की पहचान बन गया है। बहनें पौधों को राखी बांधती हैं। करमदी विकास समिति ने 300 से अधिक पौधे लगाए हैं। वर्तमान युवा महिला सरपंच ने मनरेगा के तहत 10,000 पौधों का रोपण कराया है। महिलाओं और बच्चों के लिए एक्सरसाइज पार्क भी बनाया गया है। 3 महिला सरपंच चुनी जा चुकी हैं।
यहां 100 से अधिक सक्रिय रक्तदाता हैं। राजेश पुरोहित ने 100 बार से अधिक और जितेंद्र राव ने 35 बार रक्तदान किया है। दो स्कूल हैं और सीएम राइज स्कूल प्रस्तावित है। गांव के कई लोग आज प्राचार्य, शिक्षक, वकील, अभियोजन अधिकारी और डॉक्टर बनकर समाज सेवा कर रहे हैं। 2017 से नल-जल योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंच चुका है। सामुदायिक भवन में ग्रामसभा और सामाजिक आयोजन होते हैं। त्योहार सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं।

