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भावांतर योजना: मप्र में 3500 रु. से कम में सोयाबीन बिकने पर नहीं मिल रहा लाभ, किसान हुए परेशान 

मप्र प्रदेश की मंडी में 3500 रुपए प्रति क्विंटल से कम भाव पर सोयाबीन बेचने वाले किसानों को भावांतर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे किसानों के खातों में अब तक मॉडल भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच की अंतर राशि नहीं पहुंची है। मंडी में शिकायत करने पर किसानों को जवाब मिल रहा है कि सिर्फ उन किसानों को राशि मिल रही है, जिनकी सोयाबीन 3500 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बिकी है।
 
 SOYBEAN BHAVANTAR SCHEME
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MP News: मप्र प्रदेश की मंडी में 3500 रुपए प्रति क्विंटल से कम भाव पर सोयाबीन बेचने वाले किसानों को भावांतर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे किसानों के खातों में अब तक मॉडल भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच की अंतर राशि नहीं पहुंची है। मंडी में शिकायत करने पर किसानों को जवाब मिल रहा है कि सिर्फ उन किसानों को राशि मिल रही है, जिनकी सोयाबीन 3500 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बिकी है। एवरिया के किसान मकसूद पटेल ने बताया कि 29 अक्टूबर को 16.76 क्विंटल सोयाबीन 3100 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बेची थी। लेकिन अब तक खाते में भावांतर की राशि नहीं आई। मंडी प्रशासन को जानकारी दी लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। कलमोड़ा के धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने 21 क्विंटल सोयाबीन 3300 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेची थी। मुख्यमंत्री ने वन क्लिक के जरिए राशि जारी करने की बात कही थी लेकिन अब तक पैसा नहीं आया है।

मंडी में पूछने पर जवाब मिला है कि अभी उन किसानों की राशि आ रही है, जिनकी उपज 3500 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बिकी है। किसानों का कहना है कि योजना में उपज बेचने के बाद भी उन्हें ठगा जा रहा है। खरीदी से पहले इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। अब भोपाल से तय होना है कि कम भाव पर बेचने वाले किसानों को राशि मिलेगी या नहीं।

2017-18 में हुई खरीदी की राशि अब तक नहीं मिली

जिन किसानों को भावांतर योजना में उपज बेचने के बाद भी राशि नहीं मिली उन्हें 7 साल पहले की याद आ रही है। क्योंकि 2017-18 में भी भावांतर में खरीदी हुई थी। उस दौरान उपज बेचने वाले कई किसानों को अब तक राशि नहीं मिली है। वहीं इस बार भी राशि जारी हुए एक सप्ताह हो गया है लेकिन कई किसानों के खातों में अब तक नहीं पहुंची है। बारिश से दागी हो गई सोयाबीन-भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष ललित पालीवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने भावांतर योजना में खरीदी के पहले कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। हम सरकार से एमएसपी पर सोयाबीन खरीदी की मांग कर रहे थे लेकिन सरकार ने भावांतर योजना में खरीदी शुरू की। जिन किसानों की सोयाबीन 3500 रुपए या इससे नीचे बिकी उनको भावांतर की राशि नहीं मिल रही है। अतिवृष्टि के कारण किसानों की सोयाबीन खराब हो गई थी। सरकार को सभी किसानों को योजना का लाभ देना चाहिए-मंडी सचिव लक्ष्मी भंवर ने बताया भावांतर योजना के संबंध में भोपाल स्तर से निर्णय होना है। हम इस बारे में कुछ नहीं बता सकते।