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Ratlam Railway Mandal: शिवना नदी के ब्रिज पर गलत स्लैब के चलते रुका काम, अब 2026 में ही पूरा हो पाएगा रेल प्रोजेक्ट

रतलाम के धौंसवास से दलौदा तक लगभग 85 किमी में ट्रैक डल चुका, ट्रेन चल रही है। नीमच से मलाइरगढ़ तक 25 किमी लंबे सेक्शन में भी दूसरी लाइन बिछ गई है। ट्रेन का संचालन हो रहा है। वर्तमान में दलौदा से मल्हारगढ़ तक के करीब 23 किमी लंबे रेल खंड में ओएचई, सिग्नल, ब्रिज आदि के काम चल रहे हैं।
 
RATLAM RAILWAY MANDAL

Indian Railway: रतलाम में ठेकेदार और रेलवे अफसरों की मिलीभगत के चलते रतलाम-नीमच डबलिंग प्रोजेक्ट पिछड़ता जा रहा है। 133 किमी लंबे सेक्शन का काम सितंबर 2021 में शुरू हुआ था। डेडलाइन मार्च 2025 थी, जो आठ माह पहले गुजर चुकी है। इसके बाद रेलवे ने दिसंबर 2025 तक का टारगेट सेट किया था। इसमें भी काम पूरा होना असंभव है क्योंकि अब भी दलौदा से मल्हारगढ़ तक के 23 किमी लंबे रेलखंड का काम अधूरा पड़ा है। ट्रैक तो बिछ गया है लेकिन टेक्निकल वर्क पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे में रेलवे को नवंबर में होने वाले कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी का इंस्पेक्शन भी टालना पड़ा है। इसकी असल वजह ठेकेदार की लापरवाही है। नए ट्रैक को प्लेटफॉर्म सात पर कनेक्ट करने के लिए बनाए जाने वाले आइलैंड प्लेटफॉर्म का काम जुलाई से लगभग बंद सा है। उधर शिवना नदी पर बन रहे ब्रिज पर ठेकेदार ने स्लैब गलत डाल दी, जिसे तोड़कर अब वापस नए सिरे से बनाना पड़ा। इसके अलावा स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ब्रिज के काम आधे-अधूरे पड़े हैं। इन सबके चलते प्रोजेक्ट अब 2026 में ही पूरा हो पाएगा।

परियोजना में अब तक यह काम हुआ पूरा

रतलाम के धौंसवास से दलौदा तक लगभग 85 किमी में ट्रैक डल चुका, ट्रेन चल रही है। नीमच से मलाइरगढ़ तक 25 किमी लंबे सेक्शन में भी दूसरी लाइन बिछ गई है। ट्रेन का संचालन हो रहा है। वर्तमान में दलौदा से मल्हारगढ़ तक के करीब 23 किमी लंबे रेल खंड में ओएचई, सिग्नल, ब्रिज आदि के काम चल रहे हैं।

ट्रेन यात्रियों को यह मिलेगा फायदा

प्लेटफॉर्म सात पहले से दिल्ली-मुंबई रूट से कनेक्ट है। दो लाइन होने से ट्रेनों का मूवमेंट फास्ट होगा। रतलाम-नीमच रूट से होकर इंदौर से जयपुर तक नई ट्रेनों को चलाने में आसानी होगी। प्लेटफॉर्म 4, 5 व 6 का लोड कम होगा, जहां पहले ही ट्रेनों का ट्रैफिक बहुत ज्यादा हो गया है। (Ratlam Railway Mandal)