घर का काम नहीं करने देते थे सास ससुर, पढ़ने के लिए करते थे प्रेरित, पति ने भी दिया साथ, तीसरी प्रयास में जज बनी दीपू कँवर
Success Story: इंसान जब कठिन परिश्रम करता है तो एक न एक दिन सफल जरूर होता है। बाड़मेर की बहू दीपू कंवर ने भी यह साबित कर दिया है। जब ससुराल वालों का सपोर्ट मिलता है तो बहू भी बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है। राजस्थान की रहने वाली दीपू ने यह बात को सच कर दिखाया है।
बाड़मेर की बहू और जामनगर की बेटी दीपू का चयन गुजरात न्यायिक सेवा में हो गया है और उनके जज बनने का सपना भी सरकार हो गया है। दीपू के ससुर और सास उन्हें घर का काम नहीं करने देते बल्कि हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।
वह बचपन से ही जज बनना चाहती थी लेकिन बीच में ही उनकी शादी हो गई। ससुराल वालों ने कभी भी उनके सपने को टूटने नहीं दिया। तीसरे प्रयास में दीपू कंवर ने इस कठिन परीक्षा को पास कर दिखाया।
ससुराल में ही बनाया गया हॉस्टल
दीपू का सपना नहीं टूटे इसके लिए उनके ससुराल वालों ने ससुराल में ही एक हॉस्टल बना दिया ताकि वह अच्छे से पढ़ाई कर सके। जब भी दीपू कोई काम करती तो उनके घर वाले खास कर सास ससुर बोलने की काम करने की क्या जरूरत है तुम सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो और सास ससुर की यह बातें उन्हें काफी ज्यादा मोटिवेट करती थी। दीपू के सफलता में उनके परिवार खास कर उनके साथ ससुर और पति का ज्यादा सहयोग रहा है।
7 साल पहले हुई थी शादी
दीपू की शादी 7 साल पहले बाड़मेर जिले के जालीपा निवासी लोकेंद्र सिंह के साथ हुई थी। उनके लिए यह सपना साकार करना आसान नहीं था। दीपू एक बेटी की मां भी है। उनकी तैयारी के दौरान उनके परिवार वालों ने उनका खूब साथ दिया।
